बुलंद
डराएंगे तुझे ये घने, काले बादल |
पर तू खोने न देना निष्ठा का आंचल।
हवाका रुख तो कभीभी बदलेगा,
ये बादल हटाएगा तो कभी फिर वापस ले आएगा।
तू खुदको ना खोना इन परिस्थितीयोंमें,
तेरी बुलंद आवाज गुंजने दे इन वादीयोंमें।
परिवर्तन तो है जीवनका पहला नियम,
तो तू क्यों चिंता करके खो रहा अपना संयम।
भरोसा रख, ये भी ढल जाएगा,
तुझे तराशकर निखार दे जाएगा ।
अरुंधती
No comments:
Post a Comment